ग़ज़ल

વેદાંત વાયક મોટો ભેદ

વેદાંત વાયક મોટો ભેદ
अखा भगत· Ghazal· 6 shers

यह ग़ज़ल दैवी और आसुरी गुणों के गहरे भेद पर प्रकाश डालती है, जिसमें दैवी को ईश्वर का रूप और आसुरी को एक गहरा कुआँ बताया गया है। यह दर्शाती है कि कैसे ये दोनों आपस में मिल सकते हैं, जिससे भेद करना कठिन हो जाता है और दैवी में भी आसुरी तत्वों का आभास होता है। इसलिए, ज्ञानी जन ऐसी भ्रम की स्थिति से दूर रहते हैं।

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
વેદાંત વાયક મોટો ભેદ આસુરીનો કર્યો ઉચ્છે દ;
वेदांत के वचन एक बड़ा सत्य प्रकट करते हैं और आसुरी स्वभाव का विनाश करते हैं।
2
દૈ વી તો છે ધણીનું રૂપ અખા આસુરી ઉંડો કૂ પ.
दैवीय तो सचमुच प्रभु का रूप है; अखा, आसुरी एक गहरा कुआँ है।
3
આસુરી દૈ વીને ગડબડ થઈ દીસે દૈ વી તેમાં આસુરી રહી;
आसुरी और दैवी के बीच भ्रम उत्पन्न हो गया। ऐसा प्रतीत होता है कि अब दैवी में ही आसुरी समाहित हो गई है।
4
માટે જ્ઞાની ટળતા ફરે જેમ રૂડે ઘેર જાતાં શ્વાનથી ડરે;
इसलिए ज्ञानीजन उनसे दूर रहते हैं, जैसे कोई अच्छे घर जाते समय कुत्ते से डरता है।
5
અખા શ્વાન જો પ્રલય થાય તો રૂડાને ઘેર રૂડો જાય.
अखा, यदि कुत्ते की दुनिया प्रलय का सामना करे, तो भी एक अच्छा व्यक्ति एक अच्छे घर में आश्रय पाता है।
6
ઘર તો સઘળાં રૂડાં કર્યા ત્યાં અસુરીરૂપે ભસે કૂ તરાં;
सभी घर सुंदर बनाए गए थे, पर वहाँ राक्षसी रूप में कुत्ते भौंकते हैं।
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