ग़ज़ल

જેમ બાધું જોતાં એકજ ઝાડ

જેમ બાધું જોતાં એકજ ઝાડ
अखा भगत· Ghazal· 6 shers

यह ग़ज़ल पेड़ के दृष्टांत का उपयोग करते हुए समझाती है कि एक सामान्य दृष्टिकोण विस्तृत अवलोकन से भिन्न होता है, और एक सच्चा गुरु ही ऐसी गलतफहमियों को दूर कर सकता है। यह दर्शाती है कि सभी आध्यात्मिक प्रयास परम वास्तविकता (ब्रह्म) से उत्पन्न होते हैं। अंशीन नर, स्वयं में सोया हुआ, अपने सपनों में सांसारिक दुखों का अनुभव करता है।

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लिपि व अर्थ
1
જેમ બાધું જોતાં એકજ ઝાડ વિગતે જોતાં ભાંગે જાડ્ ય;
जब सब कुछ एक साथ देखा जाता है तो वह एक ही पेड़ है, लेकिन विस्तार से देखने पर उसकी एकता समाप्त हो जाती है।
2
રંગ સ્વાદ પત્ર ફળ ફુ લ સદગુરુ મળે તો ભાંગે ભૂલ.
जैसे रंग, स्वाद, पत्ते, फल और फूल होते हैं, वैसे ही यदि सच्चा गुरु मिल जाए तो सभी भूलें मिट जाती हैं।
3
જાગ જોગ મંત્ર ફ્ળ ને સિદ્ધિ એ બ્રહ્મઉદર માંહે લી રિદ્ધિ;
जागृति, योग, मंत्र के फल और सिद्धि जैसी सभी समृद्धियाँ ब्रह्मा के ब्रह्मांडीय उदर में निहित हैं।
4
અંશીનર ઉંઘ્યો આપમાંહે સ્વપ્ન ભોગવે ત્રણ તાપ ત્યાંહે ;
शरीरधारी आत्मा अपने भीतर सो गई, और वहीं उसे सपनों तथा तीनों प्रकार के दुखों का अनुभव हुआ।
5
વિધિસહિત પરબ્રહ્મને જાણ ત્યારે અખા ટળે ભવતાણ.
विधिपूर्वक परब्रह्म को जानो, तब हे अखा, सांसारिक बंधनों का दुख समाप्त होगा।
6
આત્મલક્ષમાં નહિ પર આપ વણસંતાને કે નો બાપ;
यह दोहा बताता है कि हमें अपने स्वार्थ या दूसरों की कृपा के लिए नहीं, बल्कि देने के उद्देश्य से कार्य करना चाहिए। यह पूछता है कि संतान के बिना कौन पिता हो सकता है, जिसका अर्थ है कि दूसरों को देना ही हमारे उद्देश्य की पूर्ति है।
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