क्यूँ ज़ुल्फ़ का बोसा मुझे लेने नहीं देते — अकबर इलाहाबादी
“Why do you not let me kiss your lovely curls? / By God, I swear, I will not ruffle them!”
अर्थ
आप मुझे अपनी ज़ुल्फ़ों को चूमने क्यों नहीं देते, जबकि मैं ख़ुदा की क़सम खाकर कहता हूँ कि मैं उन्हें बिखरने नहीं दूँगा।
विस्तार
इस शे'र में आशिक़ की एक बहुत ही मीठी और शोख़ ज़िद दिखाई देती है, जहाँ 'परेशाँ' लफ़्ज़ का बड़ा ख़ूबसूरत खेल है—जिसका मतलब बिखरी हुई ज़ुल्फ़ें भी है और दिल की बेचैनी भी। आशिक़ महबूब की ज़ुल्फ़ों को चूमने की इजाज़त माँगते हुए ख़ुदा की क़सम खाता है कि वो उन्हें ज़रा भी बिखरने नहीं देगा। इस भोले-भाले वादे में मोहब्बत की एक प्यारी सी शरारत छुपी है, क्योंकि इश्क़ का नर्म सा लम्स कभी भी बेअसर नहीं रह सकता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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