है ज़ेहन में इक बात तुम्हारे मुतअल्लिक़ — अकबर इलाहाबादी

है ज़ेहन में इक बात तुम्हारे मुतअल्लिक़ ख़ल्वत में जो पूछोगे तो पिन्हाँ न करेंगे

“There is a thought within my mind concerning only you; / Ask of it in solitude, and I shall not conceal it from you.”

— अकबर इलाहाबादी

अर्थ

मेरे दिमाग में तुम्हारे बारे में एक बात है, अगर तुम अकेले में पूछोगे तो मैं उसे तुमसे छुपाऊँगा नहीं।

विस्तार

इस शेर में एक बेहद मीठी और नाज़ुक गुज़ारिश है, जैसे कोई अपने दिल का सबसे ख़ास राज़ सिर्फ़ अपनों के सामने खोलना चाहता हो। शायर कहता है कि उसके ज़ेहन में महबूब को लेकर एक बात है, मगर वह महफ़िल के शोर में ज़ाहिर करने जैसी नहीं। जब तन्हाई और ख़ामोशी का आलम होगा, तब वह बिना किसी हिचक या पर्दे के अपने दिल का हाल कह सुनाएगा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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