ज़िद है उन्हें पूरा मिरा अरमाँ न करेंगे — अकबर इलाहाबादी

ज़िद है उन्हें पूरा मिरा अरमाँ न करेंगे मुँह से जो नहीं निकली है अब हाँ न करेंगे

“They are stubborn in their resolve and will never fulfill my desire; the 'yes' that has not yet left their lips, they will never utter now.”

— अकबर इलाहाबादी

अर्थ

उन्हें इस बात की ज़िद है कि वे मेरी ख़्वाहिश पूरी नहीं करेंगे; जो 'हाँ' अब तक उनके मुँह से नहीं निकली है, वे अब कभी उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

विस्तार

इस शेर में महबूब की उस प्यारी मगर तंग करने वाली ज़िद का बयान है, जिससे हर आशिक़ वाकिफ़ होता है। शायर समझ चुका है कि महबूब ने उसकी ख्वाहिश अधूरी रखने की जैसे कसम खा ली है। जिस इक़रार या 'हाँ' का उसे मुद्दतों से इंतज़ार था, वह अब उनके लबों से कभी बाहर नहीं आएगी क्योंकि उनकी हठ ही उनका अंदाज़ बन चुकी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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