वही सूरतें रह गईं पेश-ए-नज़र जो ज़माने को फेरें इधर से उधर मगर ऐसे जमाल-ए-जहाँ-आरा जो थे रौनक़-ए-रू-ए-ज़मीं न रहे

“Only those faces linger before the sight that toss the world in disarray, yet those world-adorning beauties, the very splendor of the earth, have passed away.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

नज़रों के सामने अब केवल वही चेहरे रह गए हैं जो ज़माने में उथल-पुथल मचाते हैं, जबकि दुनिया को संवारने वाले वे खूबसूरत लोग जो ज़मीन की रौनक थे, अब नहीं रहे।

विस्तार

इस शेर में दुनिया के बदलते मिज़ाज और खोए हुए हुस्न पर एक गहरा अफ़सोस झलकता है। शायर कहता है कि हमारी आँखों के सामने अब सिर्फ़ वही चेहरे बचे हैं जो ज़माने में उथल-पुथल मचाते हैं और सुकून छीन लेते हैं। अफ़सोस इस बात का है कि वे रूहानी और खूबसूरत लोग, जिनकी चमक से यह पूरी ज़मीन आबाद और हसीन थी, अब इस दुनिया से रुख़सत हो चुके हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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