ग़म ओ रंज में 'अकबर' अगर है घिरा तो समझ ले कि रंज को भी है फ़ना किसी शय को नहीं है जहाँ में बक़ा वो ज़ियादा मलूल ओ हज़ीं न रहे

“If Akbar is besieged by sorrow and grief, know that even sorrow must meet its end; Nothing in this world possesses permanence, so let him not remain so deeply grieved.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

यदि 'अकबर' ग़म और दुख में घिरा हुआ है, तो समझ ले कि दुख भी मिट जाने वाला है। इस दुनिया में किसी चीज़ को स्थायित्व नहीं है, इसलिए उसे बहुत अधिक उदास और दुखी नहीं रहना चाहिए।

विस्तार

अकबर यहाँ एक सच्चे दोस्त की तरह हमें जिंदगी की सबसे बड़ी हक़ीक़त याद दिलाते हैं—इस दुनिया में कुछ भी हमेशा के लिए नहीं ठहरता। जब सुख और खुशियों के दिन बीत जाते हैं, तो ग़म और तकलीफें भी हमेशा नहीं रह सकतीं; उनका ख़त्म होना भी तय है। इसलिए शायर खुद को समझाते हैं कि दुख के घने बादलों से डरकर ज्यादा उदास न हो, क्योंकि यह वक्त भी जल्द ही गुज़र जाएगा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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