“Why should my mind turn toward the art of poetry, when every eye is drawn only to its flaws?”
मैं शायरी के हुनर पर अपना ध्यान क्यों लगाऊँ, जब हर किसी की नज़र सिर्फ़ कमियों और ऐबों की तरफ़ ही जाती है?
यह शेर एक रचनाकार के उस दर्द को बयां करता है, जब उसकी मेहनत और कला को समझने के बजाय लोग सिर्फ़ कमियाँ तलाशते हैं। शायर थके हुए दिल से सवाल करता है कि जब दुनिया की नज़र सिर्फ़ ख़ामियों पर ही टिकती है, तो फिर इस नाज़ुक हुनर को तराशने में जी क्यों लगाया जाए? यह किसी भी कलाकार की उस मायूसी की आवाज़ है, जो बेवजह की नुक्ताचीनी और आलोचना से टूट जाती है।
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