ग़रीब-ख़ाना में लिल्लाह दो-घड़ी बैठो बहुत दिनों में तुम आए हो इस गली की तरफ़

“For God's sake, linger a brief moment in this humble dwelling of mine; after so many long days have your steps turned toward this lane.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

खुदा के वास्ते मेरे इस गरीब-खाने में थोड़ी देर बैठ जाओ, क्योंकि बहुत दिनों के बाद तुम इस गली की तरफ आए हो।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने महबूब से बेहद सादगी और दिल की गहराई से गुज़ारिश कर रहा है। वह अपने घर को 'ग़रीब-ख़ाना' कहकर अपनी आजिज़ी दिखाता है और 'लिल्लाह' (ख़ुदा के वास्ते) कहकर बस दो घड़ी रुकने की भीख मांगता है। मुद्दतों के इंतज़ार के बाद महबूब का इस गली में भटक आना किसी चमत्कार जैसा है, इसलिए वह इस अनमोल पल को ज़रा सा थाम लेना चाहता है ताकि प्यासी रूह को तसल्ली मिल सके।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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