“Forever drawn toward these idols of clay, O God, what has become of my heart today?”
मेरा दिल हमेशा बुतों (सुंदर महबूबों) की ओर ही आकर्षित रहता है; हे ईश्वर, मेरी तबीयत को आख़िर क्या हो गया है?
उर्दू शायरी में 'बुत' यानी मूर्ति का इस्तेमाल अक्सर दुनियावी महबूब के लिए किया जाता है, जो बेहद खूबसूरत मगर संगदिल होता है। शायर यहाँ बड़ी मासूमियत और हल्की सी शोख़ी के साथ ख़ुदा से ही पूछ रहा है कि आख़िर उसके दिल को क्या हो गया है जो वो हमेशा इन पत्थर-दिल हसीनों पर ही फ़िदा रहता है। यह शेर इश्क़ और बंदगी के बीच की उस लाचारी को दर्शाता है जहाँ इंसान चाहकर भी दिल के हाथों हार जाता है।
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