“The rise and fall of nations are wonders of divine decree; / Yet ever caught in constant flux, this political affair will be.”
कौमों का उत्थान और पतन ईश्वर की कुदरत के चमत्कार हैं, और यह राजनीतिक मामला हमेशा बदलाव और उलट-फेर के अधीन रहा है।
शायर यहाँ बड़ी खूबसूरती से तारीख़ के उतार-चढ़ाव और मुल्कों की तक़दीर पर बात कर रहे हैं। किसी क़ौम की बुलंदी या उसकी गिरावट को हम भले ही कुदरत का करिश्मा या नसीब कह लें, लेकिन असल में यह इंसानी सियासत और बदलते दौर का ही खेल होता है। यह शेर हमें याद दिलाता है कि दुनिया में कोई भी इक़्तिदार हमेशा नहीं रहता; सियासत की फितरत ही लगातार बदलना और उलट-फेर है।
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