“There is relish in dinner speeches, as The Pioneer prints the tale; Alongside the turning of the heavens, our friends' pursuits prevail.”
दावतों में भाषणों का मज़ा लिया जाता है और उसकी ख़बर 'पायनियर' अख़बार में छपती है; इस प्रकार ज़माने के चलने के साथ-साथ दोस्तों का काम भी मज़े से चल रहा है।
अकबर इलाहाबादी का यह शेर औपनिवेशिक दौर के उस तबके पर एक मीठा और तीखा तंज़ है, जो अंग्रेज़ी तौर-तरीक़ों की चमक-दमक में खोया हुआ था। डिनर में तक़रीरें झाड़ना और मशहूर अख़बार 'पायनियर' में अपनी तारीफ़ छपवाना ही इन दोस्तों के लिए कामयाबी का पैमाना बन गया था। ज़माने और क़ुदरत की अपनी बड़ी गर्दिशें चलती रहें, पर वे बड़े ठाठ से अपनी दिखावे और रुतबे की छोटी सी दुनिया में मशगूल हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
