कहाँ का शर्क़ी कहाँ का ग़र्बी तमाम दुख सुख है ये मसावी यहाँ भी इक बा-मुराद ख़ुश है वहाँ भी इक ग़म से जल रहा है

“Why speak of East, why speak of West? Joy and sorrow everywhere are equal: here too, one thrives with wishes granted; there too, one burns in sorrow's flame.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

पूरब या पश्चिम का कोई भेद नहीं है क्योंकि हर जगह सुख और दुःख बराबर हैं; यहाँ भी कोई अपनी मुराद पूरी होने पर खुश है और वहाँ भी कोई ग़म में जल रहा है।

विस्तार

शायर यहाँ पूरब और पश्चिम के सारे बनावटी फ़ासलों को मिटाकर इंसानियत की साझी हक़ीक़त बयां कर रहे हैं। दुनिया का कोई भी कोना हो, सुख और दुख का बँटवारा हर जगह एक जैसा ही है। कहीं कोई अपनी मुराद पूरी होने पर मुस्कुरा रहा है, तो वहीं कोई ग़म की आग में झुलस रहा है—यही इंसानी ज़िंदगी का असली सच है जो सरहदों से परे हम सबको एक धागे में पिरोता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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