नज़र भी आए जो ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ तो समझें ये कोई पालिसी है इलेक्ट्रिक लाईट उस को समझें जो बर्क़-वश कोई कोई दे

“Should tangled tresses catch the eye, deem it to be some clever policy; and take that for electric light, which flashes rare like lightning's gleam.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर कभी उलझी हुई ज़ुल्फ़ें नज़र भी आ जाएँ तो समझें कि यह कोई सोची-समझी नीति या चाल है, और बिजली की रोशनी सिर्फ़ उसे समझें जो कभी-कभार कौंधती बिजली की तरह दिखाई दे।

विस्तार

इस शेर में शायर ने पारंपरिक इश्क़िया शायरी को आधुनिक दौर के तंज़ के साथ बड़े चुटीले अंदाज़ में पेश किया है। महबूब की बलखाती ज़ुल्फ़ों को अब दिलकश अदा के बजाय दुनियावी नफ़ा-नुक्सान या चालाकी भरी कोई 'पॉलिसी' समझा जाने लगा है। वहीं हुस्न की बिजली जैसी अनोखी चमक को किसी क़ुदरती करिश्मे के बजाय म्यूनिसिपैलिटी की रुक-रुक कर जलने वाली 'इलेक्ट्रिक लाइट' मान लिया जाता है—यह नए दौर की बेरुखी और बनावट पर एक बेहद प्यारी चुटकी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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