वही परियाँ हैं अब भी राजा इन्दर के अखाड़े में मगर शहज़ादा-ए-गुलफ़ाम पर शैदा नहीं होतीं

“The very same fairies still dance in Raja Indar’s celestial court, Yet over Prince Gulfam, they swoon with love no more.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

राजा इंद्र की सभा में आज भी वही परियाँ मौजूद हैं, लेकिन अब वे शहज़ादा-ए-गुलफ़ाम पर फ़रेफ़्ता या मुग्ध नहीं होतीं।

विस्तार

यह शेर मशहूर नाटक 'इंदर सभा' के क़िस्से से जुड़ा है, जहाँ राजा इंद्र के अखाड़े की एक परी शहज़ादा गुलफ़ाम पर दिल-ओ-जान से फ़िदा हो गई थी। शायर कहना चाह रहे हैं कि महफ़िल की चमक-दमक और हुस्न की रौनक़ें तो आज भी वैसी ही हैं, मगर दिलों से वह दीवाना बना देने वाला सच्चा इश्क़ ग़ायब हो चुका है। यह आज के दौर की बेदिली पर एक बेहद ख़ूबसूरत और उदास तब्सिरा है, जहाँ जज़्बात की गहराई अब रस्मों में बदल गई है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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