यहाँ की औरतों को इल्म की पर्वा नहीं बे-शक मगर ये शौहरों से अपने बे-परवा नहीं होतीं

“No doubt, the women here care little for scholarly art; yet never toward their husbands do they bear an uncaring heart.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

बेशक यहाँ की औरतों को ज्ञान या शिक्षा की कोई परवाह नहीं है, लेकिन वे अपने पतियों के प्रति कभी लापरवाह नहीं होती हैं।

विस्तार

यह शेर एक सीधे-सादे सामाजिक यथार्थ और घरेलू रिश्तों की गर्मजोशी को बड़े हल्के-फुल्के अंदाज़ में बयां करता है। शायर कहता है कि भले ही यहाँ की औरतों को किताबी तालीम या इल्म की फ़िक्र न रही हो, लेकिन अपने शौहर और रिश्ते के प्रति उनकी तवज्जो और वफ़ा में कभी कोई कमी नहीं आती। इसमें एक तरफ़ समाज की रिवायती सादगी झलकती है, तो दूसरी तरफ़ यह बात भी सामने आती है कि अपनायत और ख़ुलूस किसी डिग्री या औपचारिक ज्ञान के मोहताज नहीं होते।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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