मिरी बेताबियाँ भी जुज़्व हैं इक मेरी हस्ती की ये ज़ाहिर है कि मौजें ख़ारिज अज़ दरिया नहीं होतीं

“My restless yearnings are an inseparable part of my being; it is evident that waves cannot exist apart from the river.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मेरी बेचैनियाँ भी मेरे अस्तित्व का ही एक हिस्सा हैं, क्योंकि यह स्पष्ट है कि लहरें कभी नदी से अलग नहीं हो सकतीं।

विस्तार

शायर अपनी बेचैनी और तड़प को कोई कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ज़िंदगी का एक ज़रूरी हिस्सा मानते हैं। जैसे दरिया से उसकी लहरों को अलग नहीं किया जा सकता और ये मौजें ही साबित करती हैं कि पानी में रवानगी है, ठीक वैसे ही दिल की बेताबियाँ बताती हैं कि हम सचमुच ज़िंदा हैं। यह शेर हमें समझाता है कि शांत पत्थर बन जाने से बेहतर है कि दिल में एहसास की लहरें उठती रहें, क्योंकि यही हरकत इंसान के वजूद की असली पहचान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.