कुश्ता आख़िर आतिश-ए-फ़ुर्क़त से होना है मुझे और चंदे सूरत-ए-सीमाब तड़पा लीजिए

“Slain at last by the fire of parting I am bound to be; for a while longer, like restless quicksilver, let me writhe in agony.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

आखिरकार मुझे जुदाई की आग में ही मरना है, इसलिए कुछ देर और मुझे पारे की तरह बेकरार करके तड़पा लीजिए।

विस्तार

शायर यहाँ जुदाई के दर्द को एक गहरे और लाचार अंदाज़ में बयां कर रहा है। उसे बखूबी मालूम है कि विरह की आग आख़िरकार उसकी जान ले ही लेगी, इसलिए वह महबूब से कहता है कि जब मेरा अंत तय ही है, तो कुछ पल और मुझे पारे की तरह छटपटा लेने दीजिए। आग पर पारा जिस बेचैनी से तड़पता है, आशिक़ उसी तड़प को अपनी मोहब्बत की आख़िरी रज़ा मानकर गले लगा रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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