“With the arrival of spring, O Akbar, you have swooned away; Open your eyes, good sir, and take this cup of wine.”
फूलों के मौसम यानी वसंत के आते ही अकबर आप बेहोश हो गए हैं; जनाब, अपनी आँखें खोलिए और शराब का प्याला लीजिए।
इस शेर में बहार (फ़स्ल-ए-गुल) के आते ही दिल पर छाने वाले मदहोश कर देने वाले असर का बड़ा ख़ूबसूरत और मज़ाकिया अंदाज़ पेश किया गया है। शायर पर मौसम की रंगीनी का जादू ऐसा चला कि वे शराब पिए बिना ही बेसुध हो गए, जिस पर साक़ी या दोस्त उन्हें छेड़ते हुए कहता है कि ज़रा होश में आइए, अभी तो शराब का जाम थामना बाक़ी है। यह शेर कुदरत के हुस्न और उर्दू शायरी के शोख़ अंदाज़-ए-बयां की एक बेहद प्यारी मिसाल है।
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