ख़ुश-नुमा चीज़ें हैं बाज़ार-ए-जहाँ में बे-शुमार एक नक़द-ए-दिल से या-रब मोल क्या क्या लीजिए

“Countless are the alluring wares in this worldly marketplace; With just the single coin of a heart, O Lord, what all can one purchase?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

दुनिया के इस बाज़ार में बेशुमार ख़ूबसूरत चीज़ें मौजूद हैं, हे भगवान! दिल की महज़ एक पूँजी से आख़िर क्या-क्या ख़रीदा जाए?

विस्तार

शायर इस दुनिया की तुलना एक ऐसे सजे-धजे बाज़ार से करता है जहाँ लुभाने वाली चीज़ों और ख़्वाहिशों की कोई कमी नहीं है। मगर विडंबना यह है कि इस भरे बाज़ार में ख़रीदारी के लिए इंसान के पास सिर्फ़ एक ही सिक्का है—उसका अपना दिल ('नक़द-ए-दिल')। यह शेर ज़िंदगी की उस कशमकश को ख़ूबसूरती से छूता है कि इस असीम दुनिया के अनगिनत आकर्षणों के सामने अपने इस अकेले और नाज़ुक दिल को आख़िर किस-किस पर न्योछावर किया जाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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