पाँव पकड़ कर कहती है ज़ंजीर-ए-ज़िंदाँ में रहो वहशत-ए-दिल का है ईमा राह-ए-सहरा लीजिए

“Clutching my feet, the prison chain implores, 'Remain bound in the cell,' while the wild frenzy of my heart beckons, 'Take to the desert sands.'”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

क़ैदख़ाने की ज़ंजीर पाँव पकड़ कर कहती है कि क़ैद में ही रहो, जबकि दिल की दीवानगी का इशारा है कि सहरा का रास्ता पकड़ लो।

विस्तार

इस शेर में दुनिया की बंदिशों और दिल की दीवानगी के बीच की खींचतान को बहुत खूबसूरती से उभारा गया है। जेल की ज़ंजीरें मानों पाँव पकड़ कर कह रही हैं कि तुम यहीं कैद रहो, मगर दिल का जुनून और पागलपन इशारा कर रहा है कि सब कुछ छोड़कर सहरा यानी खुले वीराने की राह नाप लो। यह शेर बताता है कि जब रूह में इश्क़ की बेचैनी जागती है, तो वह समाज और दुनिया की किसी भी बेड़ी में बँधकर नहीं रह सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.