“Clutching my feet, the prison chain implores, 'Remain bound in the cell,' while the wild frenzy of my heart beckons, 'Take to the desert sands.'”
क़ैदख़ाने की ज़ंजीर पाँव पकड़ कर कहती है कि क़ैद में ही रहो, जबकि दिल की दीवानगी का इशारा है कि सहरा का रास्ता पकड़ लो।
इस शेर में दुनिया की बंदिशों और दिल की दीवानगी के बीच की खींचतान को बहुत खूबसूरती से उभारा गया है। जेल की ज़ंजीरें मानों पाँव पकड़ कर कह रही हैं कि तुम यहीं कैद रहो, मगर दिल का जुनून और पागलपन इशारा कर रहा है कि सब कुछ छोड़कर सहरा यानी खुले वीराने की राह नाप लो। यह शेर बताता है कि जब रूह में इश्क़ की बेचैनी जागती है, तो वह समाज और दुनिया की किसी भी बेड़ी में बँधकर नहीं रह सकती।
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