लिए जाता है जोश-ए-शौक़ हम को राह-ए-उल्फ़त में नहीं तो ज़ोफ़ से दुश्वार चलना दो-क़दम होता

“The fervor of longing bears me along the path of love; else, from sheer frailty, taking even two steps would be too hard.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मोहब्बत के रास्ते पर मुझे सिर्फ़ मेरे शौक़ और चाहत का जोश ही आगे लिए जा रहा है, वरना कमज़ोरी की वजह से मेरे लिए दो क़दम चलना भी मुश्किल होता।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपनी बेबसी और इश्क़ की अनदेखी ताक़त का बड़ा ख़ूबसूरत बयान करता है। वह कहता है कि बीमारी और कमज़ोरी की वजह से उसके लिए दो क़दम चलना भी भारी पड़ रहा है। लेकिन महबूब से मिलने का गहरा जज़्बा और लगन ही वह सहारा है, जो उसे इस कठिन रास्ते पर खींचे लिए जा रहा है—यानी इंसान को जिस्म नहीं, उसका शौक़ चलाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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