अगर क़ब्रें नज़र आतीं न दारा-ओ-सिकन्दर की मुझे भी इश्तियाक़-ए-दौलत-ओ-जाह-ओ-हशम होता

“Had I not beheld the graves of Darius and Alexander, I too would have yearned for wealth, status, and regal splendor.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर मैंने दारा और सिकंदर जैसे महान शासकों की क़ब्रें न देखी होतीं, तो मुझे भी धन-दौलत, ऊँचे पद और शान-ओ-शौकत की चाह होती।

विस्तार

दारा और सिकंदर इतिहास के वो अज़ीम बादशाह रहे हैं, जिनकी ताकत और हुकूमत की मिसालें दी जाती हैं। शायर कहता है कि अगर उसने इन महान विजेताओं की ख़ाक में मिली क़ब्रें न देखी होतीं, तो शायद वह भी दुनिया की दौलत और रुतबे के पीछे भाग रहा होता। यह शेर बहुत सादगी से ज़िंदगी की नश्वरता का आईना दिखाता है—जब इतने बड़े सम्राट् भी आख़िरकार मिट्टी में मिल गए, तो फिर दुनियावी शान-ओ-शौकत की हवस कैसी?

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