न रहने पाए दीवारों में रौज़न शुक्र है वर्ना तुम्हें तो दिल-लगी होती ग़रीबों पर सितम होता

“Thank heavens no chinks remained within the walls, else what a plight: / To you it would be playful jest, but for the poor, a cruel spite.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

यह शुक्र की बात है कि दीवारों में कोई सुराख़ या झरोखा नहीं रहा, वरना आपके लिए तो यह महज़ दिललगी होती मगर ग़रीबों पर बड़ा ज़ुल्म होता।

विस्तार

शायर यहाँ ग़रीबों की बेबसी और उनकी मर्यादा की बात करते हुए राहत की सांस लेते हैं कि उनकी दीवारों में कोई सुराख़ या दरार (रौज़न) नहीं बची। ताक़तवर लोगों या तमाशबीनों के लिए किसी की तंगहाली में झांकना महज़ दिल-बहलावा और मज़ाक हो सकता था, मगर उन कमज़ोरों के लिए यह उनकी इज़्ज़त और सुकून पर सीधा वार होता। यह शेर बड़ी नज़ाकत से दिखाता है कि जिसे एक तबक़ा सिर्फ़ खेल-तमाशा समझता है, वह ग़रीब के लिए कितनी बड़ी तकलीफ़ बन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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