लब-ओ-चश्म-ए-सनम गर देखने पाते कहीं शाइ'र कोई शीरीं-सुख़न होता कोई जादू-रक़म होता

“Had poets ever caught a glimpse of the beloved's lips and eyes, one would turn sweet-spoken, the other write enchanted lines.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर शायर कहीं महबूब के होंठ और आँखें देख पाते, तो कोई मीठे बोल बोलने वाला बन जाता और कोई जादुई शायरी लिखने वाला हो जाता।

विस्तार

शायर यहाँ महबूब के हुस्न की ऐसी अनोखी तारीफ़ कर रहे हैं, जो सीधे शायरी के हुनर से जुड़ी है। उनका कहना है कि अगर दुनिया के शायर कभी महबूब के होंठ और नशीली आँखें देख पाते, तो उन होंठों की मिठास पाकर कोई शीरीं-सुख़न (मीठा बोलने वाला) बन जाता और आँखों का सम्मोहन देखकर कोई जादू जैसी शायरी लिखने लगता। यह शेर बतलाता है कि दुनिया की सारी बेहतरीन शायरी दरअसल महबूब के हुस्न के एक दीदार की मोहताज है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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