उन्हीं की बे-वफ़ाई का ये है आठों-पहर सदमा वही होते जो क़ाबू में तो फिर काहे को ग़म होता

“Day and night, it is the sting of their faithlessness I bear; had they been within my sway, what sorrow would be there?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे रात-दिन उनकी बेवफ़ाई का ही सदमा रहता है; अगर वे मेरे वश में होते, तो भला मुझे कोई दुख क्यों होता?

विस्तार

यहाँ शायर दिल टूटने की उस टीस को बयां कर रहा है जो दिन-रात, आठों पहर इंसान को सालती रहती है। महबूब की बेवफ़ाई का दर्द इसलिए भी इतना गहरा है क्योंकि किसी के दिल या उसकी वफ़ा पर हमारा कोई ज़ोर नहीं चलता। अगर महबूब हमारे बस में होता तो शायद यह ग़म ही न होता, मगर इश्क़ की सबसे बड़ी लाचारी यही है कि जिस पर हम दिल हारते हैं, उसी पर हमारा कोई इख़्तियार नहीं होता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.