पंजा-ए-इश्क़ ने बेताब किया जब सूँ मुझे — वली दकनी
“Ever since the fierce grasp of love made me restless, the wound of my heart came to dwell within the tear of my collar.”
अर्थ
जब से इश्क़ के पंजे ने मुझे बेचैन किया है, तब से मेरे दिल का ज़ख़्म आकर मेरे फटे हुए गिरेबान में बस गया है।
विस्तार
यहाँ शायर इश्क़ को किसी कोमल एहसास के बजाय एक शिकारी पंजे की तरह देखता है, जिसने उसे पकड़कर पूरी तरह बेचैन कर दिया है। उर्दू शायरी में गरेबान फाड़ना दीवानगी और बेखुदी की सबसे बड़ी निशानी माना जाता है। शायर कहता है कि जब से मोहब्बत ने उसे अपनी गिरफ़्त में लिया है, दिल का अंदरूनी ज़ख़्म और फटे हुए गरेबान की दरार एक हो गए हैं—यानी दिल का गहरा दर्द अब बाहर की दीवानगी बनकर छलक उठा है।
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