देख ऐ अहल-ए-नज़र सब्ज़ा-ए-ख़त में लब-ए-लाल — वली दकनी

देख ऐ अहल-ए-नज़र सब्ज़ा-ए-ख़त में लब-ए-लाल रंग-ए-याक़ूत छुपा है ख़त-ए-रैहान में आ

“Behold, O discerning eye, the ruby lips framed by youthful verdant down; Come, see the ruby's glowing hue concealed within the Rayhan script.”

— वली दकनी

अर्थ

हे पारखी नज़र वाले, चेहरे के हल्के सब्ज़ ख़त के बीच उन सुर्ख़ होंठों को देख; आ और देख कि किस तरह ख़त-ए-रैहान की सुंदर लिखाई में याक़ूत का लाल रंग छुपा हुआ है।

विस्तार

शायर यहाँ हुस्न की बारीकियाँ समझने वालों को महबूब के चेहरे का दिलकश मंज़र देखने की दावत दे रहा है। महबूब के लाल सुर्ख़ होंठ और उनके इर्द-गिर्द उभरता सब्ज़ा-ए-ख़त मिलकर ऐसा नज़ारा बनाते हैं, जैसे ख़ूबसूरत 'ख़त-ए-रैहान' (सुलेखन) की तहरीर में कोई याक़ूत छुपा दिया गया हो। यहाँ 'ख़त' के दोहरे मानी यानी चेहरे के रोंए और क़लम की तहरीर को जोड़कर जवानी के ताज़े हुस्न की बेहद नफ़ीस तारीफ़ की गई है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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