दर्द-मंदाँ को ब-जुज़ दर्द नहीं सैद मुराद — वली दकनी
“For the grief-stricken, no quarry is desired save pain alone; O sovereign of the realm of madness, enter the wilderness of sorrow!”
अर्थ
दुखियों के लिए दर्द के सिवा कोई दूसरा वांछित शिकार या मकसद नहीं है, इसलिए ऐ दीवानगी के मुल्क के बादशाह, ग़म के इस वीराने में आ जाओ।
विस्तार
यहाँ शायर दर्द को किसी सज़ा की तरह नहीं, बल्कि सच्चे आशिक़ों की सबसे अनमोल दौलत के रूप में पेश करता है। इश्क़ की राह में तड़पने वाले दिलों को तकलीफ़ के सिवा किसी और चीज़ की चाह नहीं होती; उनके लिए दर्द ही असल मंज़िल और शिकार है। 'जुनून के बादशाह' यानी दीवानगी के सबसे बड़े प्रतीक को पुकारते हुए शायर उसे ग़म के इस वीराने में बुलाता है, जहाँ दुनिया के सारे दिखावे मिट जाते हैं और सिर्फ़ पाक जज़्बा बाकी रहता है।
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