क़ुर्बान परी मुख पे हुई चोब सी जल कर — वली दकनी

क़ुर्बान परी मुख पे हुई चोब सी जल कर ये बात अजाइब मह-ए-ताबाँ सूँ कहूँगा

“Burned like dry wood, a sacrifice upon that fairy face; this wondrous tale I shall recount to the radiant moon.”

— वली दकनी

अर्थ

उस परी जैसे चेहरे पर मैं लकड़ी की तरह जलकर न्योछावर हो गया; यह अनोखी और अचरज भरी बात मैं चमकते हुए चाँद से कहूँगा।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपनी दीवानगी और बेपनाह समर्पण की दास्तान सुना रहा है। वह अपने महबूब के परियों जैसे हसीन चेहरे पर सूखी लकड़ी की मानिंद जलकर पूरी तरह फ़ना हो चुका है। यह क़िस्सा इतना अनोखा और हैरतअंगेज़ है कि शायर इसे आसमान के चमकते चाँद को बताना चाहता है, ताकि हुस्न की मिसाल माना जाने वाला चाँद भी इस बेमिसाल इश्क़ की ताब देखकर दंग रह जाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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