तारीफ़ तिरे क़द की अलिफ़-वार सिरीजन — वली दकनी

तारीफ़ तिरे क़द की अलिफ़-वार सिरीजन जा सर्व-ए-गुलिस्ताँ कूँ ख़ुश-अल्हाँ सूँ कहूँगा

“Praising your graceful stature, upright as an Alif, my beloved, / I shall sing in sweet melodies unto the garden's cypress.”

— वली दकनी

अर्थ

हे प्रिय, मैं बाग़ के सरू के पेड़ के पास जाकर मधुर आवाज़ में तुम्हारे अलिफ़ जैसे सीधे क़द की तारीफ़ करूँगा।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने महबूब के सीधे, सुडौल और हसीन क़द की तुलना अरबी के पहले हर्फ़ 'अलिफ़' से कर रहा है, जो सादगी और मुकम्मल सीधेपन की मिसाल है। वो कहता है कि मैं बाग़ के सरू के दरख़्त के पास जाऊँगा—जिसे शायरी में ऊँचे और दिलकश क़द का पैमाना माना जाता है—और मीठे सुरों में उसे तेरे क़द की ख़ूबसूरती सुनाऊँगा। यह कुदरत को आईना दिखाने और महबूब की तारीफ़ में खो जाने का एक बेहद नाज़ुक और प्यारा अंदाज़ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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