'वली' मुश्ताक़ है तेरी निगह का — वली दकनी

'वली' मुश्ताक़ है तेरी निगह का मुझे तुझ चश्म-ए-शहला की क़सम है

“Wali yearns deeply for a glance from you; I swear by your dark, enchanting eyes.”

— वली दकनी

अर्थ

वली तुम्हारी एक नज़र का तलबगार है, और मुझे तुम्हारी ख़ूबसूरत, नशीली आँखों की क़सम है।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में वली अपने महबूब से बस एक नज़र पाने की दिली तड़प बयां कर रहे हैं। वे महबूब की 'चश्म-ए-शहला' यानी नशीली और गहरी खूबसूरत आँखों की क़सम खाकर अपने इश्क़ की सच्चाई साबित करते हैं। यह अंदाज़ दिखाता है कि आशिक़ के लिए महबूब का दीदार ही उसका सबसे बड़ा ईमान और सुकून बन चुका है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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