है अगर ख़ातिर-ए-उश्शाक़ अज़ीज़ — वली दकनी

है अगर ख़ातिर-ए-उश्शाक़ अज़ीज़ ग़ैर कूँ दर्स दिखाया न करो

“If the hearts of your lovers are dear to you, grant not the stranger a glimpse of your sight.”

— वली दकनी

अर्थ

अगर आपको अपने प्रेमियों के दिल की परवाह है, तो किसी ग़ैर (पराए) को अपना दीदार मत कराया कीजिए।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ की वह नाज़ुक और मासूम जलन दिखाई देती है, जो सिर्फ़ सच्चे प्यार में ही मुमकिन है। शायर महबूब से बड़ी नज़ाकत से गुज़ारिश करता है कि अगर उसे अपने दीवानों के दिल की ज़रा भी क़द्र है, तो वह अपना दीदार ग़ैरों को न कराए। यहाँ महबूब के चेहरे की एक झलक को किसी अनमोल सौग़ात की तरह देखा गया है, जिसे गै़रों में बाँटना सच्चे चाहने वालों के दिल को तोड़ देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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