अपनी ख़ूबी के अगर तालिब हो — वली दकनी

अपनी ख़ूबी के अगर तालिब हो अपने तालिब कूँ जलाया न करो

“If you are a seeker of your own fine grace, do not burn the seeker who yearns for your face.”

— वली दकनी

अर्थ

यदि आप अपनी अच्छाई या ख़ूबसूरती की चाह रखते हैं, तो अपने चाहने वाले को मत तड़पाया या जलाया कीजिए।

विस्तार

इस शेर में शायर 'तालिब' (चाहने वाले) लफ़्ज़ के ज़रिए महबूब को बड़ी नज़ाकत से समझा रहा है। वह कहता है कि अगर आप वाकई अपनी ख़ूबसूरती और अच्छाई की बुलंदी चाहते हैं, तो अपने चाहने वाले के दिल को यूँ जुदाई और बेरुख़ी की आग में मत जलाइए। सच्ची ख़ूबसूरती सिर्फ़ चेहरे के निखार में नहीं, बल्कि महबूब के करम और उसकी मेहरबानी में छलकती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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