दो-रंगी सूँ तिरी ऐ सर्व-ए-रा'ना — वली दकनी

दो-रंगी सूँ तिरी ऐ सर्व-ए-रा'ना कभू राज़ी कभू बेज़ार हैं हम

“By your fickle ways, O graceful cypress tall, / Sometimes we are pleased, sometimes weary of it all.”

— वली दकनी

अर्थ

हे सुंदर प्रियतम, तुम्हारे बदलते स्वभाव और दोहरेपन के कारण हम कभी तुमसे प्रसन्न होते हैं तो कभी तंग आ जाते हैं।

विस्तार

शायर अपने महबूब को 'सर्व-ए-रा'ना' यानी सरू जैसे दिलकश क़द वाला कहकर पुकारता है, मगर उसके पल-पल बदलते मिज़ाज से हैरान भी है। कभी महबूब की ज़रा सी इनायत दिल को खुशी से भर देती है, तो कभी उसकी बेरुखी और दोहरा रवैया इंसान को थका देता है। यह शेर इश्क़ के उसी झूले की तस्वीर है, जहाँ आशिक़ कभी बेहद मुतमइन होता है तो कभी पूरी तरह बेज़ार।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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