शराब-ए-शौक़ सें सरशार हैं हम — वली दकनी

शराब-ए-शौक़ सें सरशार हैं हम कभू बे-ख़ुद कभू हुशियार हैं हम

“Brimming with the wine of longing are we; at times lost to ourselves, at times sober and aware.”

— वली दकनी

अर्थ

हम चाहत और तड़प की शराब से पूरी तरह मदहोश हैं, इसलिए कभी तो हम अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं और कभी पूरी तरह होश में आ जाते हैं।

विस्तार

शायर यहाँ इश्क़ और तड़प को एक ऐसी रूहानी शराब के रूप में देखते हैं, जिसके नशे में वो पूरी तरह डूबे हुए हैं। इस दीवानगी का आलम यह है कि कभी तो वो अपने आप से बेख़बर होकर महज़ एहसास बन जाते हैं, और कभी अचानक दुनिया और अपने जज़्बात को लेकर बेहद सजग व होशमंद हो उठते हैं। यह शे'र मुहब्बत के उस हसीन तज़ुर्बे को बयां करता है जहाँ बेखुदी और होशमंदी दोनों साथ-साथ चलती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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