बाताँ लगन की मत पूछ ऐ शम-ए-बज़्म-ए-ख़ूबी मुद्दत से तुझ झलक का परवाना हो रहा हूँ

“Ask not of the depth of my devotion, O candle of beauty's gathering; for ages I have been a moth, yearning for a single glimpse of your radiant light.”

— वली दकनी
अर्थ

ऐ सौंदर्य की महफ़िल की शमा, मेरी लगन और प्रेम की बातें मत पूछ; मैं बहुत समय से तुम्हारी एक झलक पाने के लिए परवाना बना हुआ हूँ।

विस्तार

इस शेर में शायर ने शमा और परवाने के सदाबहार रूपक के ज़रिए अपनी बेपनाह मोहब्बत को बड़ी सादगी से बयां किया है। वह महबूब को हुस्न की महफ़िल की रौशनी मानकर कहते हैं कि मेरी लगन की गहराई मत पूछो, क्योंकि यह कोई पल भर की दीवानगी नहीं बल्कि मुद्दतों का इंतज़ार है। सिर्फ़ तुम्हारी एक झलक पाने की चाहत में दिल कब से परवाना बनकर ख़ुद को न्योछावर करने को तैयार बैठा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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