न पूछो आह-ओ-ज़ारी की हक़ीक़त अज़ीज़ाँ आशिक़ी का मुक़तज़ा है

“Ask not the truth behind these sighs and weeping; / Dear friends, such sorrow is what love demands.”

— वली दकनी
अर्थ

मेरी आहों और रोने की हक़ीक़त मत पूछो; ऐ प्यारे दोस्तों, यह तो आशिक़ी और मोहब्बत का स्वाभाविक तक़ाज़ा है।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने हमदर्द दोस्तों से बड़ी सादगी से कहता है कि वे उसकी आहों और आंसुओं की वजह न पूछें। इश्क़ की राह में तड़प और दर्द कोई अनहोनी बात नहीं, बल्कि यह तो सच्ची मोहब्बत की लाज़िमी शर्त और तकाज़ा है। वह अपने इस रंज-ओ-ग़म को किसी शिकायत के तौर पर नहीं, बल्कि आशिक़ी के एक ज़रूरी इम्तिहान और पहचान के रूप में अपनाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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