मिरा दिल मिस्ल परवाने के था मुश्ताक़ जलने का लगी उस शम्अ सूँ आख़िर लगन आहिस्ता-आहिस्ता

“My heart, just like a moth, was yearning to burn in the flame; bound to that candle at last, devotion slowly came.”

— वली दकनी
अर्थ

मेरा दिल पतंगे की तरह जलने का आकांक्षी था, और आख़िरकार धीरे-धीरे उस शमा से उसका गहरा लगाव या प्रेम हो गया।

विस्तार

शायर यहाँ परवाने और शम्अ के क्लासिकी रिश्ते के ज़रिए इश्क़ की गहराई बयां कर रहे हैं। जिस तरह परवाना आग से डरने के बजाय उसमें फना हो जाने को बेताब रहता है, वैसे ही आशिक़ का दिल भी मुहब्बत की तपिश में जलने का मुश्ताक़ यानी तलबगार था। धीरे-धीरे और बड़ी नफ़ासत से, महबूब की शम्अ से यह लगन ऐसी जुड़ी कि दिल पूरी तरह उस इश्क़ में समा गया।

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