'वली' मत हासिदाँ की बात सूँ दिल कूँ मुकद्दर कर कि आख़िर दिल सूँ जावेगा ग़ुबार आहिस्ता-आहिस्ता

“O Wali, let not the words of the envious cloud your heart with dismay, / For slowly, surely, the dust of grief shall lift and drift away.”

— वली दकनी
अर्थ

ऐ वली, ईर्ष्या करने वालों की बातों से अपने दिल को उदास या मैला मत करो, क्योंकि आखिरकार दिल से यह मलाल और ग़ुबार धीरे-धीरे दूर हो जाएगा।

विस्तार

वली यहाँ एक सच्चे दोस्त की तरह अपने ही दिल को तसल्ली दे रहे हैं कि जलने वालों की कड़वी बातों से अपने मन को मैला मत करो। दिल एक आईने जैसा होता है, जिस पर दूसरों की ईर्ष्या धूल बनकर छाने की कोशिश करती है। शायर समझाते हैं कि सब्र रखो, वक़्त के मरहम से यह ग़ुबार धीरे-धीरे खुद-ब-खुद छँट जाएगा और दिल का सुकून लौट आएगा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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