“Turned into a tear, my heart has reached the beloved's lane; like a voyager aboard a ship, it entered the Kaaba, gently and slowly.”
मेरा दिल आँसू बनकर महबूब की गली में पहुँच गया है, मानो कोई कश्ती-सवार धीरे-धीरे काबे में दाख़िल हो गया हो।
यहाँ शायर अपने दिल की तुलना एक ऐसे मुसाफ़िर से कर रहे हैं जो आंसुओं की कश्ती पर सवार होकर महबूब की गली तक जा पहुँचा है। आशिक़ के लिए उसके महबूब का दर किसी काबे यानी पवित्र तीर्थ से कम नहीं है, जहाँ पहुँचना एक पाकीज़ा इबादत की तरह है। यह शेर इश्क़ के दर्द, सब्र और रूहानी गहराई को बहुत ही नाज़ुक अंदाज़ में बयां करता है।
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