बुलबुल ओ परवाना करना दिल के तईं काम है तुझ चेहरा-ए-गुल-नार का

“To make of the heart both nightingale and moth / Is the miracle wrought by your rose-flame face.”

— वली दकनी
अर्थ

दिल को बुलबुल और परवाना दोनों बना देना तुम्हारे सुर्ख़ लाल चेहरे का ही काम है।

विस्तार

शायर महबूब के चेहरे को 'गुल-नार' यानी अनार के फूल जैसा सुर्ख़ और आग जैसा दहकता हुआ बताता है। चूँकि वह चेहरा फूल (गुल) है, तो आशिक़ का दिल बुलबुल बनकर उसकी तारीफ़ में गाता है, और चूँकि उसमें आग (नार) की तपिश है, तो दिल परवाना बनकर उस पर जल मरने को तैयार हो जाता है। एक ही वक़्त में दिल को गीत गाने वाला प्रेमी और क़ुर्बान होने वाला पतंगा बना देना, महबूब के हुस्न का अनोखा जादू है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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