जो है तेरे दहन में रंग ओ ख़ूबी कहाँ ये रंग ये ख़ूबी कली में

“The delicate hue and grace that dwell upon your lips, where could such charm and color ever be found within a bud?”

— वली दकनी
अर्थ

जो रंग और सुंदरता तुम्हारे मुख (होंठों) में है, वह रंग और ख़ूबी किसी कली में कहाँ मिल सकती है।

विस्तार

उर्दू शायरी में महबूब के नाज़ुक होठों की तुलना अक्सर फूलों की बंद कली से की जाती है, लेकिन यहाँ शायर अपने महबूब के हुस्न को कुदरत से भी बेहतर मानता है। वह बड़ी नफ़ासत से कहता है कि जो रंगत, ताज़गी और ख़ूबसूरती तुम्हारे लबों में है, वह किसी कली में भला कहाँ मिल सकती है। यह शेर महबूब की बेमिसाल सुंदरता की एक बेहद दिलकश और प्यार भरी तारीफ़ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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