अगर गुलशन तरफ़ वो नौ-ख़त-ए-रंगीं-अदा निकले गुल ओ रैहाँ सूँ रंग-ओ-बू शिताबी पेशवा निकले

“Should toward the garden that graceful, fair youth make his way, scent and color from rose and basil would rush forth to welcome him without delay.”

— वली दकनी
अर्थ

यदि वह सुंदर और नाजुक नवयुवक महबूब बाग़ की ओर निकले, तो गुलाब और तुलसी से रंग और ख़ुशबू तुरंत उसके स्वागत के लिए आगे बढ़ आएँ।

विस्तार

इस शेर में महबूब के हुस्न और उसकी दिलकश जवानी का बेहद ख़ूबसूरत नक़्शा खींचा गया है। शायर कहता है कि अगर वह नज़ाकत भरा हसीन महबूब ज़रा बाग़ की तरफ़ टहलने भी निकल पड़े, तो फ़ितरत उसके आगे झुक जाएगी। गुलाब का रंग और रैहाँ (तुलसी) की खुशबू अपने फूलों को छोड़कर तुरंत दौड़ी चली आएगी, मानो किसी बादशाह के इस्तक़बाल के लिए दरबारी आगे बढ़ते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.