जूँ 'वली' रात दिन है मह्व-ए-ख़याल जिस कूँ तुझ वस्ल की तमन्ना है

“Just like Wali, day and night lost in reverie is he, who holds in his heart the yearning for union with thee.”

— वली दकनी
अर्थ

जिस किसी को भी तुम्हारे मिलन की चाहत है, वह 'वली' की तरह दिन-रात तुम्हारे ही ख्यालों में डूबा रहता है।

विस्तार

वली दकनी इस शेर में मोहब्बत की उस कैफ़ियत का बयान कर रहे हैं, जहाँ आशिक़ हर पल महबूब की यादों में डूबा रहता है। जिसे महबूब से मिलने यानी वस्ल की सच्ची आरज़ू होती है, उसके लिए दिन और रात का फ़र्क़ मिट जाता है और वह मुकम्मल तौर पर ख़यालों की दुनिया में खो जाता है। अपने तख़ल्लुस का ज़िक्र करके वली ने ख़ुद को इस बेक़रार मगर पुरनूर तलब की एक जीती-जागती मिसाल बना दिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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