कमर-ए-नाज़ुक ओ दहान-ए-सनम फ़िक्र बारीक है मुअम्मा है

“The beloved's slender waist and delicate mouth—one is a subtle thought, the other an enigma.”

— वली दकनी
अर्थ

महबूब की नाज़ुक कमर एक बारीक विचार की तरह है और उसका छोटा मुँह एक पहेली के समान है।

विस्तार

उर्दू शायरी की क्लासिकी रिवायत में महबूब की पतली कमर और नाज़ुक होंठों का तसव्वुर बहुत अनोखा रहा है। शायर यहाँ इसी बात को ख़ूबसूरती से बाँधते हुए कहता है कि महबूब की कमर इतनी बारीक है कि उसे समझने के लिए बहुत गहरी और बारीक सोच चाहिए, और उसका छोटा सा मुँह एक अनसुलझी पहेली जैसा है। यह शेर महबूब के हुस्न को सिर्फ़ जिस्मानी नहीं, बल्कि ख़यालों और रहस्यों की ऐसी दुनिया बनाता है जो नज़र से ज़्यादा एहसास और हैरत का मामला है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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