“You are the Supreme Divine, I the mortal soul; You the Master, I Your servant true. Father, mother, teacher, and companion—in every way my well-wisher are You.”
हे प्रभु, आप परब्रह्म हैं और मैं जीव हूँ; आप स्वामी हैं और मैं आपका सेवक हूँ। आप ही मेरे पिता, माता, गुरु और सखा हैं तथा हर प्रकार से मेरे हितैषी हैं।
इस सुंदर पद में भक्त ईश्वर के प्रति अपने संपूर्ण समर्पण और अगाध प्रेम को व्यक्त करता है। कवि कहते हैं कि हे प्रभु, आप परम ब्रह्म हैं और मैं एक साधारण जीव हूँ। आप मेरे स्वामी हैं और मैं आपका सेवक। इतना ही नहीं, आप ही मेरे पिता, माता, गुरु और सच्चे सखा हैं। आप हर रूप में केवल मेरा कल्याण चाहने वाले परम हितैषी हैं। यह पंक्तियाँ हमें भरोसा दिलाती हैं कि ईश्वर हमसे दूर नहीं हैं। जब हम उन्हें अपने हर रिश्ते में महसूस करते हैं, तो हमें जीवन में कभी अकेलापन नहीं लगता। परमात्मा ही हमारे सच्चे साथी, रक्षक और मार्गदर्शक हैं।
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