नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो ? मो समान आरत नहिं, आरतिहर तोसो ॥

“O Lord, You are the guardian of the helpless, and who is more helpless than I? No one is afflicted by sorrow like me, and none dispels all distress like You.”

— तुलसीदास
अर्थ

हे प्रभु! आप अनाथों और बेसहारा लोगों के स्वामी हैं, और मेरे जैसा अनाथ कौन होगा? मेरे समान कोई संकटग्रस्त नहीं है और आपके जैसा दुखों को दूर करने वाला कोई नहीं है।

विस्तार

इस सुंदर पद में भक्त प्रभु के सामने पूरी विनम्रता और प्रेम से अपना हृदय खोलकर रख देता है। वह कहता है कि हे नाथ, आप अनाथों और बेसहारा लोगों के सच्चे रक्षक हैं, और भला मुझसे बड़ा अनाथ कौन होगा? मेरे जितना कोई दुखी और व्याकुल नहीं है, और आपके सिवा उस दुख को हरने वाला भी कोई दूसरा नहीं है। यह रचना हमें सिखाती है कि सच्ची प्रार्थना में किसी दिखावे की जरूरत नहीं होती, केवल सरल समर्पण चाहिए। जब हम अपनी सारी चिंताएं ईश्वर को सौंप देते हैं, तो उनकी असीम कृपा हमें हर संकट से उबार लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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