चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक किये । लट लटकनि मनो मत्त मधुपगन मादक मदहि पिये॥

“With lovely cheeks and restless eyes, adorned with a forehead mark of saffron bright, / The straying curls hang down like drunken bees, steeped deep in nectar's sweet delight.”

— सूरदास
अर्थ

सुंदर गाल, चंचल नेत्र और माथे पर गोरोचन का तिलक सुशोभित है। मुख पर लटकती हुई बालों की लटें ऐसी प्रतीत होती हैं मानो मतवाले भंवरों के समूह ने नशीला मकरंद पी रखा हो।

विस्तार

यह पद बाल रूप के अत्यंत मनमोहक और अलौकिक सौंदर्य को दर्शाता है। उनके कोमल गाल और चंचल आँखें सहज ही मन मोह लेती हैं, वहीं माथे पर लगा गोरोचन का तिलक उनके मुख की शोभा को और बढ़ा देता है। गालों पर झूलती हुई घुंघराले बालों की लटें ऐसी प्रतीत होती हैं मानो मीठे रस के नशे में चूर भंवरे मस्ती में झूम रहे हों। यह सुंदर चित्रण वात्सल्य रस और प्रेम की मिठास से भरा है, जो सुनने वाले के हृदय को असीम शांति और आनंद से भर देता है।

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चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक किये । | Sukhan AI