ग़ज़ल

सोभित कर नवनीत लिये

ہاتھ میں مکھن سجائے
सूरदास· Pad· 3 shers

इस पद में महाकवि सूरदास ने बालकृष्ण के मनमोहक और वात्सल्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण किया है। हाथों में ताजा मक्खन लिए घुटनों के बल चलते और मुख पर दही लपेटे धूल-धूसरित कन्हैया का यह बाल रूप अत्यंत मनोरम और आनंददायी है।

Source: Sri Sur Sagar (Khemraj Shrikrishnadas, 1924) · HI

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लिपि व अर्थ
1
सोभित कर नवनीत लिये ॥ घुटुरुन चलत रेनु तनुमंडित मुख दधिलेप किये ॥
हाथ में ताजा मक्खन लिए हुए बालक कृष्ण अत्यंत सुंदर लग रहे हैं। वे घुटनों के बल चल रहे हैं, उनका शरीर धूल से सना हुआ है और मुख पर दही का लेप लगा हुआ है।
2
चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक किये । लट लटकनि मनो मत्त मधुपगन मादक मदहि पिये॥
सुंदर गाल, चंचल नेत्र और माथे पर गोरोचन का तिलक सुशोभित है। मुख पर लटकती हुई बालों की लटें ऐसी प्रतीत होती हैं मानो मतवाले भंवरों के समूह ने नशीला मकरंद पी रखा हो।
3
कठुला कंठवज्र केहरि नख राजत रुचिर हिये। धन्य सूर एको पल या सुख का सत कल्प जिये ॥
गले में कठुला और सुंदर हृदय पर शेर का नाखून सुशोभित है; सूरदास कहते हैं कि इस सुख का एक पल भी धन्य है, इसके बिना सौ कल्पों तक जीने का क्या लाभ?
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सोभित कर नवनीत लिये | Sukhan AI